आंखों से बह चले आंसू, गला रुंध गया... चंडीगढ़ के नए मेयर बने सौरभ जोशी ने पिता को याद कर भरी सिसकियां, तस्वीर सामने रखकर बैठे
Chandigarh BJP Mayor Saurabh Joshi Gets Emotional For His Father
Chandigarh Mayor Saurabh Joshi: चंडीगढ़ के नए मेयर का ऐलान हो गया है। वार्ड नंबर-12 से बीजेपी पार्षद सौरभ जोशी 18 वोट लेकर चंडीगढ़ के नए मेयर बने हैं। इस जीत को लेकर जहां बीजेपी खेमे में उत्साह का माहौल दिखा तो वहीं नए-नए मेयर बने सौरभ जोशी बेहद भावुक नजर आए। चंडीगढ़ मेयर पद पर काबिज होने की खुशी तो एक तरफ थी, लेकिन यहां तक पहुंचने के पीछे का एक लंबा इंतजार, पिता की राजनीतिक विरासत और लोगों के साथ, विश्वास और उनके सहयोग को याद कर सौरभ जोशी की आंखों से आंसू बह चले। बोलते हुए गला रुंध गया। सिसकियां भरते हुए सौरभ जोशी ने अपने पिता, परिवार के लिए और अपने सहयोगियों और उनपर विश्वास और उनकी ताकत बनने वाले लोगों के लिए मीडिया के सामने भावुक वक्तव्य जारी किया।


चंडीगढ़ को संवेदना, ईमानदारी-न्याय का शहर बनाएंगे
सौरभ जोशी का कहना है कि उनके पिता से जो उन्हें सीख मिली वो ये है कि अगर किसी की आँखों में आंसू हों तो राजनीति नहीं, इंसानियत पहले रखो। इसके साथ जोशी ने पक्ष और विपक्ष पर भी बात की और कहा कि मैं जानता हूं ये सदन मतों से बंटा हुआ है, पर दर्द, संघर्ष और उम्मीद हम सबको एक ही भाषा सिखाती है। इसलिए आज मैं एक प्रतिद्वंद्वी नहीं, एक सहयात्री की तरह बात कर रहा हूं। क्योंकि कुर्सी एक की होती है, पर शहर हम सबका होता है। सौरभ जोशी ने कहा कि मुझे पूरा भरोसा है कि आने वाले 300 दिनों में हम सब पक्ष-विपक्ष से ऊपर उठकर चंडीगढ़ को संवेदना, ईमानदारी और न्याय का शहर बनाएंगे। मैं वादा नहीं करता कि कभी थकूँगा नहीं, पर ये ज़रूर कहता हूं कि पिता की विरासत को कभी झुकने नहीं दूंगा।
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सौरभ जोशी का पूरा वक्तव्य
सौरभ जोशी ने कहा, "एक पिता की तपस्या, एक बेटे का संकल्प। मैं वहाँ से आया हूँ जहाँ राजनीति शोर नहीं थी, सेवा एक संस्कार थी। जहाँ मेरे पिता ने ज़िन्दगी अपने लिए नहीं, उनके लिए जी जिन्हें समाज अक्सर देखना भूल जाता था। मैंने उन्हें देखा है सुबह सबसे पहले किसी मज़दूर की पीड़ा सुनते हुए और रात सबसे आखिर में किसी ग़रीब की चिंता करते हुए। उनके लिए दलित, वंचित, मज़लूम सिर्फ शब्द नहीं थे, वे परिवार थे। घर में कभी आराम की बातें नहीं हुई, बस एक ही सीख मिली- अगर किसी की आँखों में आंसू हों तो राजनीति नहीं, इंसानियत पहले रखो''।
जोशी ने आगे कहा, "आज अगर मैं यहाँ खड़ा हूँ, तो ये मेरी उड़ान नहीं, उनकी ज़मीन से जुड़ी तपस्या का फल है। मेरे 14 साल आसान नहीं थे। नाम नहीं पुकारा गया, मंच नहीं मिला। कई बार लगा कि शायद इंतज़ार ही मेरी नियति में है। लेकिन हर बार पिता की आवाज़ भीतर से आती थी- बेटा, सही रास्ता देर से पहुँचाता है पर खाली हाथ नहीं लौटाता। और उन कठिन दिनों में मेरा परिवार मेरी ढाल बनकर खड़ा रहा। मेरे मित्र मेरी हिम्मत बने। मेरे वार्ड के बुजुर्गों ने मुझे दुआओं से थामा। युवाओं ने उम्मीद की मशाल जलाई। और हर निवासी ने मुझे बिना शर्त प्यार, विश्वास और ताकत दी. जब मैं थका, उन्होंने मुझे चलाया। जब मैं चुप हुआ, उन्होंने मेरी आवाज़ बनकरमेरा नाम लिया।''
सौरभ जोशी ने कहा, ''आज जब मैं यहां पहुँचा हूं, तो पूरे विनम्र भाव से कहता हूँ- इस यात्रा का हर श्रेय उन सबको जाता है। आज इस सदन में मुझे सिर्फ समर्थन नहीं, अपने पिता की परछाई दिखती है। विपक्ष की आँखों में भी वही सम्मान, वही विश्वास नज़र आता है। मैं जानता हूँ ये सदन मतों से बँटा है, पर दर्द, संघर्ष और उम्मीद हम सबको एक ही भाषा सिखाती है। आज मैं आपसे प्रतिद्वंद्वी नहीं,एक सहयात्री की तरह बात कर रहा हूँ। क्योंकि कुर्सी एक होती है, पर शहर हम सबका होता है। मुझे पूरा भरोसा है कि आने वाले 300 दिनों में हम सब पक्ष-विपक्ष से ऊपर उठकर चंडीगढ़ को संवेदना, ईमानदारी और न्याय का शहर बनाएँगे''।
वहीं जोशी ने कहा, ''मैं वादा नहीं करता कि कभी थकूँगा नहीं, पर ये ज़रूर कहता हूँ, पिता की विरासत को कभी झुकने नहीं दूँगा। और आज इस सदन में खड़े होकर मैं कोई नारा नहीं दे रहा हूँ, मैं एक स्वीकृति कर रहा हूँ, एक्सेप्ट कर रहा हूँ। अगर मेरे शब्दों में ज़रा सी भी सच्चाई है, तो वो मेरे पिता की सीख से आई है। अगर मेरे कदम आज भी ज़मीन से जुड़े हैं, तो मेरे वार्ड के लोगों की दुआओं का असर है। मैं उन बुजुर्गों को नमन करता हूँ जिनकी आँखों में आज भी मेरे लिए आशीर्वाद है। मैं उन युवाओं को सलाम करता हूँ जिन्होंने मुश्किल समय में भी मेरा साथ नहीं छोड़ा। मैं अपने परिवार और मित्रों के आगे और पार्टी के आगे सर झुकाता हूँ क्योंकि जब सब शांत थे, वे मेरी ताकत थे''।
जोशी ने कहा, ''आज अगर मैं यहां पहुंचा हूं तो पूरे विनम्र भाव से कहता हूँ, इसमें मेरा कुछ भी नहीं, ये सब आपका विश्वास है, आपका धैर्य है, आपकी दुआएं हैं। और अगर मेरे पिता आज कहीं से ये दृश्य देख रहे होंगे, तो शायद उन्हें गर्व नहीं, सुकून मिल रहा होगा। मैं वादा करता हूँ ये कुर्सी कभी मेरे और जनता के बीच दीवार नहीं बनेगी। ये पद नहीं, ये ऋण है। ये जीत नहीं, ये ज़िम्मेदारी है। और ये ज़िम्मेदारी मैं आखिरी सांस तक जनता के साथ निभाऊँगा। आप लोगों का शुक्रिया"
नितिन नबीन को चंडीगढ़ से पहली जीत समर्पित
चंडीगढ़ के नए मेयर बने सौरभ जोशी ने बीजेपी लीडरशिप का भी आभार व्यक्त किया है। जोशी ने इस जीत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस जीत का श्रेय दिया। इसके साथ ही बीजेपी के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को चंडीगढ़ से यह पहली जीत समर्पित की है। सौरभ जोशी ने कहा कि बीजेपी के सैकड़ों कार्यकर्ता देशभर में दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। ये जीत उनकी भी है। फिलहाल मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर तीनों ही पदों पर जीत दर्ज करने के बाद चंडीगढ़ बीजेपी में जश्न का महौल बना हुआ है। ढ़ोल-नगाड़े बज रहे हैं। एक-दूसरे का मुंह मीठा किया जा रहा है।